Site icon Mother & Baby Matters

NFHS-6 रिपोर्ट: बच्चों के स्वास्थ्य में बड़ा सुधार, कुपोषण घटा और टीकाकरण बढ़ा

NFHS-6 survey shows child stunting in India falls below 30 percent as immunisation coverage reaches record high | Mother And Baby Matters | Freepik

NFHS-6 survey shows child stunting in India falls below 30 percent as immunisation coverage reaches record high | Mother And Baby Matters | Freepik

देश में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर राहत भरी तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, बच्चों में कुपोषण के कई प्रमुख संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के अनुसार कम लंबाई, जो लंबे समय तक कुपोषण का संकेत माना जाता है) पहली बार 30 प्रतिशत से नीचे आ गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग की दर NFHS-5 के 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव बच्चों के बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सरकारी योजनाओं के प्रभाव को दर्शाता है।

कुपोषण के अन्य संकेतकों में भी सुधार

सर्वेक्षण में पाया गया कि बच्चों में गंभीर वेस्टिंग (तीव्र कुपोषण) की दर 7.7 प्रतिशत से घटकर 5.2 प्रतिशत हो गई है। वहीं, कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 32.1 से घटकर 31.8 प्रतिशत पर आ गया है।

हालांकि यह गिरावट सीमित है, लेकिन विशेषज्ञ इसे सकारात्मक दिशा में बढ़ता कदम मान रहे हैं।

बीमारियों पर भी नियंत्रण

बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी दर्ज की गई है। तीव्र श्वसन संक्रमण (Acute Respiratory Infection) के लक्षणों वाले बच्चों का प्रतिशत 2.8 से घटकर 1.9 प्रतिशत रह गया। वहीं गंभीर दस्त (Severe Diarrhoea) के मामलों में भी कमी आई और इसकी दर केवल 0.5 प्रतिशत दर्ज की गई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्वच्छता, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और जागरूकता अभियानों का असर इन आंकड़ों में दिखाई देता है।

टीकाकरण अभियान की बड़ी सफलता

NFHS-6 की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक बच्चों के टीकाकरण कवरेज में हुई बढ़ोतरी है। 12 से 23 महीने आयु वर्ग के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया है।

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 95.6 प्रतिशत बच्चों को उनके अधिकांश टीके सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से लगाए गए। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत पहुंच को दर्शाता है।

शहरों में बढ़ रही है Infertility! Mumbai Hospital Study के Results चौंकाने वाले हैं।

रोटावायरस वैक्सीन कवरेज में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, रोटावायरस वैक्सीन की कवरेज 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत हो गई, जो सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है। वहीं खसरा (Measles) की दूसरी खुराक लेने वाले बच्चों का प्रतिशत भी 58.6 से बढ़कर 71.8 प्रतिशत पहुंच गया।

क्या कहते हैं ये आंकड़े?

NFHS-6 के नतीजे बताते हैं कि भारत बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं क्योंकि देश में हर तीन में से लगभग एक बच्चा अब भी कम वजन या स्टंटिंग की समस्या से प्रभावित है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस सुधार को स्थायी बनाने के लिए पोषण योजनाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों और टीकाकरण अभियानों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

NFHS-6 की प्रमुख बातें

स्रोत: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6)

Exit mobile version