Mother & Baby Matters

Low Birth Weight | जन्म से ही खतरा? कम वजन वाले बच्चों में दिल की बीमारी का जोखिम ज्यादा

Milky blood in a Mumbai infant led doctors to diagnose the rare inherited disorder Familial Lipoprotein Lipase Deficiency (LPLD).

कम जन्म वजन (Low Birth Weight) को अब केवल जन्म के समय की समस्या नहीं माना जा रहा है। हाल के कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों में आगे चलकर दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक ऐसा जोखिम कारक है, जो जीवनभर हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

रिसर्च के अनुसार, कम वजन में जन्म लेने वाले बच्चों के दिल और रक्त वाहिकाओं में संरचनात्मक और कार्यात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। ये बदलाव शरीर में रक्त प्रवाह को प्रभावित करते हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं और आगे चलकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज, इस्केमिक स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा देते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्भ में बच्चे की सीमित वृद्धि (Restricted Growth) इन समस्याओं की मुख्य वजह है। यह स्थिति शरीर के हृदय संबंधी तंत्र में स्थायी बदलाव ला सकती है, जिसका असर लंबे समय तक बना रहता है।

Low Birth Weight | Mother and Baby Matters | Credit: Freepik
Low Birth Weight | Mother and Baby Matters | Credit: Freepik

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत शोध, जिसमें यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी में साझा किए गए निष्कर्ष भी शामिल हैं, बताते हैं कि कम जन्म वजन वाले लोगों में स्ट्रोक का खतरा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाता है। यह जोखिम वयस्क जीवन में वजन या जीवनशैली से स्वतंत्र रूप से बना रहता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शुरुआती विकास संबंधी कारक भविष्य के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

भारत में भी कम जन्म वजन की समस्या गंभीर बनी हुई है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ, दिल्ली द्वारा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2019–2021) के आंकड़ों के आधार पर किए गए अध्ययन के अनुसार, देश में लगभग 17.29 प्रतिशत नवजात शिशु कम वजन के साथ जन्म लेते हैं। इनमें से करीब 6 प्रतिशत शिशु अत्यंत कम वजन (1500 ग्राम से कम) की श्रेणी में आते हैं।

इस अध्ययन में 1.75 लाख से अधिक माताओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि जिन माताओं की शिक्षा का स्तर अधिक था और जिनका आर्थिक स्तर बेहतर था, उनमें कम जन्म वजन की संभावना कम थी। हालांकि, एक महत्वपूर्ण और चिंताजनक तथ्य यह सामने आया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीनटल केयर (ANC) विज़िट्स की संख्या का कम जन्म वजन पर कोई खास प्रभाव नहीं दिखा। इससे यह संकेत मिलता है कि केवल विज़िट्स की संख्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मातृ पोषण की कमी, गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल का अभाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम जन्म वजन के प्रमुख कारण हैं। ये सभी कारक बच्चे के महत्वपूर्ण अंगों, खासकर दिल, के विकास को प्रभावित करते हैं और भविष्य में गंभीर बीमारियों की नींव रख सकते हैं।

पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञों का कहना है कि मातृ पोषण में सुधार और एंटीनटल केयर सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना बेहद आवश्यक है। गर्भावस्था से लेकर बचपन तक समय पर और सही हस्तक्षेप करने से भविष्य में हृदय रोगों के बढ़ते बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यह निष्कर्ष एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—बेहतर जन्म परिणाम केवल शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में दिल की बीमारियों से बचाव और जीवनभर स्वस्थ रहने के लिए भी बेहद जरूरी हैं।

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