बाड़मेर अस्पताल में 3,500 ” यशोदा माताओं ” ने किया स्तन दूध दान, हजारों नवजात बच्चों को मिला लाभ

Yashoda Mothers | बाड़मेर अस्पताल की “यशोदा माताओं” हजारों नवजात शिशुओं की जीवनदायिनी बनकर बनी मिसाल 

To Read in English Click : Rajasthan’s Yashoda Mothers Donate Breast Milk at Barmer Hospital to Save Newborn Babies – Mother & Baby Matters

किसी भी नवजात शिशु के लिए जन्म के तुरंत बाद मां का गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, अमृत के समान माना जाता है। यह न केवल शिशु के स्वस्थ और समुचित विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होता है, बल्कि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मां का यह पहला दूध नवजात को कई गंभीर संक्रमणों और बीमारियों से बचाने में मदद करता है तथा आगे चलकर उसके पूरे जीवन में बेहतर स्वास्थ्य की नींव रखता है।

हालांकि, कुछ माताएं ऐसी भी होती हैं जिनमें प्रसव के बाद पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं उतर पाता, जबकि कुछ महिलाएं चिकित्सीय कारणों से अपने शिशु को स्तनपान कराने में असमर्थ रहती हैं। ऐसे में मदर मिल्क बैंक और स्तन दूध दान जैसी पहलें नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायिनी साबित होती हैं।

ऐसे में राजस्थान के बाड़मेर जिला अस्पताल में स्थापित मदर मिल्क बैंक नवजात शिशुओं के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां 3,500 से अधिक महिलाओं ने “यशोदा माताएं” बनकर स्तन दूध दान किया है, जिससे उन शिशुओं को पोषण मिल सका जो कई कारणों से अपनी जैविक माताओं से दूध प्राप्त नहीं कर पाते।

भगवान श्रीकृष्ण की पालनकर्ता मां यशोदा से प्रेरित यह पहल निस्वार्थ मातृत्व और मानवता की मिसाल बन चुकी है।

बाड़मेर अस्पताल में यशोदा माताओं ने दान की 29,000 से अधिक यूनिट स्तन दूध

4 मार्च 2018 को स्थापित मदर मिल्क बैंक को क्षेत्र की महिलाओं का अभूतपूर्व सहयोग मिला है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार:

  • 3,523 यशोदा माताओं ने स्तन दूध दान किया
  • 29,882 यूनिट स्तन दूध एकत्र किया गया
  • 3,165 नवजात शिशुओं को इसका लाभ मिला
  • दूध को -19°C तापमान पर छह महीने तक सुरक्षित रखा जाता है

यह पहल विशेष रूप से समय से पहले जन्मे बच्चों, अनाथ शिशुओं और उन नवजातों के लिए वरदान साबित हो रही है जिनकी माताएं चिकित्सकीय कारणों से स्तनपान नहीं करा पा रही हैं।

बाड़मेर अस्पताल की यशोदा माताओं की पहल में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान

अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि दान किए गए प्रत्येक दूध के नमूने की विस्तृत जांच की जाती है। दूध को HIV सहित अन्य संक्रमणों के लिए टेस्ट किया जाता है, जिसके बाद उसे सुरक्षित प्रक्रिया के तहत संरक्षित किया जाता है ताकि नवजात शिशुओं को पूरी तरह सुरक्षित दूध उपलब्ध कराया जा सके।

अस्पताल हर चरण में स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सख्त मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करता है।

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डॉक्टरों ने यशोदा माताओं की सराहना की

बाड़मेर जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. हनुमान राम चौधरी ने महिलाओं के इस योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि मातृत्व केवल जैविक संबंधों तक सीमित नहीं है। एक मां का दूध किसी दूसरे परिवार के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकता है।

सहायक नर्स दाई(ANM) मंजू भाटी ने बताया कि:

  • वर्तमान में 220 यूनिट (6,600 मिलीलीटर) दूध स्टोरेज में उपलब्ध है
  • वर्ष 2018 में लगभग 1,000 यूनिट दूध अजमेर भेजा गया था
  • अब तक 12,220 यूनिट दूध सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं में उपयोग किया जा चुका है

राजस्थान में मानवता की मिसाल बनीं यशोदा माताएं

बाड़मेर का मदर मिल्क बैंक यह दर्शाता है कि सामुदायिक भागीदारी से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। ये “यशोदा माताएं” न केवल नवजात शिशुओं को पोषण दे रही हैं, बल्कि पूरे राजस्थान में स्तन दूध दान और नवजात देखभाल के प्रति जागरूकता भी फैला रही हैं।

यह पहल आज इस बात का सशक्त उदाहरण बन चुकी है कि संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी मिलकर असहाय नवजातों के जीवन को सुरक्षित बना सकती है।

 

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