एक दुर्लभ और अत्यंत जटिल infant liver transplant in India ने 18 महीने के एक बच्चे को नया जीवन दिया है, जो एक गंभीर मेटाबॉलिक बीमारी से जूझ रहा था। यह सर्जरी Osmania General Hospital में की गई और यह भारत में सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
यह मामला न केवल शिशु सर्जरी की चुनौतियों को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि समय पर इलाज से बच्चों का भविष्य कितना बेहतर हो सकता है।
बीमारी को समझना
बच्चे को Glycogen Storage Disease Type III नामक दुर्लभ बीमारी थी। यह तब होती है जब शरीर में एक जरूरी एंजाइम की कमी हो जाती है, जो ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदलने में मदद करता है।
इसके कारण बच्चे में ये समस्याएँ थीं:
- बार-बार लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया)
- मांसपेशियों में कमजोरी
- बढ़ा हुआ लिवर
- विकास और ऊर्जा की कमी
स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टरों ने infant liver transplant in India को एकमात्र इलाज माना।
शिशु लिवर ट्रांसप्लांट क्यों मुश्किल है
शिशुओं में लिवर ट्रांसप्लांट बेहद जटिल होता है क्योंकि:
- रक्त वाहिकाएँ बहुत छोटी होती हैं
- शरीर में ब्लड वॉल्यूम कम होता है
- लंबे ऑपरेशन में शरीर अस्थिर हो सकता है
- जटिलताओं का खतरा अधिक होता है
इसके बावजूद, 14 घंटे चले इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट (पिता ने किया डोनेशन)
इस मामले में बच्चे के पिता ने लिवर का एक हिस्सा दान किया, जिससे यह एक living donor liver transplant बना। लिवर की खास बात यह है कि यह खुद को regenerate कर सकता है, इसलिए डोनर और मरीज दोनों ठीक हो सकते हैं।
सरकारी योजना के तहत मुफ्त इलाज
यह infant liver transplant in India पूरी तरह मुफ्त में किया गया, जो Rajiv Aarogyasri scheme के तहत कवर हुआ।
- निजी अस्पतालों में लागत: ₹50 लाख तक
- सरकार द्वारा पोस्ट-ट्रांसप्लांट दवाएँ भी मुफ्त
- परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा
ऑपरेशन करने वाली मेडिकल टीम
यह सर्जरी Osmania General Hospital में की गई। इसमें एक अनुभवी टीम शामिल थी, जिसका नेतृत्व डॉ. मधुसूदन (हेड ऑफ सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) ने किया।
टीम में डॉ. वसीफ अली, डॉ. सुधर्शन रेड्डी, डॉ. अभिमन्यु, डॉ. रघु, डॉ. माधवी, डॉ. सुनील, डॉ. रमेश कुमार, डॉ. गीता, डॉ. भावना और डॉ. मौनिका शामिल थे।
सरकार की प्रतिक्रिया
Damodar Raja Narasimha ने इस सफल infant liver transplant in India की सराहना की और कहा कि यह सरकारी अस्पतालों की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
ट्रांसप्लांट के बाद भविष्य
बच्चे की स्थिति अभी स्थिर है, लेकिन लंबे समय तक देखभाल जरूरी है:
- जीवनभर दवाएँ (immunosuppressants)
- नियमित मेडिकल फॉलो-अप
- ग्रोथ और डेवलपमेंट मॉनिटरिंग
- संक्रमण से बचाव
सही देखभाल से बच्चा सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।
माता-पिता के लिए संदेश
यह केस माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण सीख देता है:
- समय पर बीमारी की पहचान जरूरी है
- भारत में उन्नत इलाज उपलब्ध है
- सरकारी योजनाएँ इलाज को सस्ता और सुलभ बनाती हैं
- गंभीर बीमारियों में भी सकारात्मक परिणाम संभव हैं

